राजगीर में आज से मलमास मेला शुरु, सीएम सम्राट चौधरी ने किया शुभारंभ, एक महीने तक नहीं दिखते कौए, विदेशों से भी पहुंचे श्रद्धालु

बिहार के नालंदा जिले के ऐतिहासिक शहर राजगीर में विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मेले का उद्घाटन किया।

राजगीर में आज से मलमास मेला शुरु, सीएम सम्राट चौधरी ने किया शुभारंभ, एक महीने तक नहीं दिखते कौए, विदेशों से भी पहुंचे श्रद्धालु
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नालंदा:बिहार के नालंदा जिले के ऐतिहासिक शहर राजगीर में विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला  की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को ब्रह्मकुंड परिसर में वैदिक मंत्रों के उच्चारण, शंखनाद और पारंपरिक ध्वजारोहण समारोह के बीच मेले का उद्घाटन किया। ध्वजारोहण के बाद मुख्य कार्यक्रम सभा भवन में आयोजित किया गया, जहां तपोवन तीर्थ रक्षा पांडा समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सम्मानित किया और उन्हें एक स्मृति चिन्ह भेंट किया। 15 जून तक चलने वाले इस मेले के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से साधु-संत और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

इस दौरान पंडा समिति की ओर से मुख्यमंत्री का नागरिक अभिनंदन भी किया गया। राजगीर का यह ऐतिहासिक मेला अगले एक महीने यानी 15 जून तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। पिछले आयोजन में करीब 2 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी, जबकि इस बार यह संख्या 2 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।

राजगीर में श्रद्धालुओं के लिए खास व्यवस्था की गई हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए जर्मन हैंगर टेक्नोलॉजी का उपयोग करके बनाए गए वॉटरप्रूफ टेंट 11 जगहों पर लगाए गए हैं, जबकि तीन जगहों पर यात्रियों के लिए आश्रय स्थल बनाए गए हैं। पीने के पानी के लिए मेला परिसर के भीतर 300 विशेष पेयजल कियोस्क लगाए गए हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए एक मिनी मेडिकल सिटी स्थापित की गई है, जिसमें 8 अस्थायी अस्पताल और 18 मेडिकल कैंप शामिल हैं।

33 कोटि देवताओं का होता है वास

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर तीसरे साल आने वाले 13वें महीने को मलमास कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब इस 13वें महीने का निर्माण हुआ, तो इसके अवगुणों और मलिनता के कारण कोई भी देवता इसका स्वामी बनने को तैयार नहीं हुआ। तब भगवान विष्णु ने इसे स्वीकार किया। मान्यता है कि इस एक महीने की अवधि में स्वर्ग के सभी 33 कोटि देवी-देवता अपने लोक को छोड़कर राजगीर में ही प्रवास करते हैं। यही कारण है कि इस दौरान देश के अन्य हिस्सों में मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन राजगीर की पवित्र धरती पर पूजा-पाठ, दान-पुण्य और स्नान करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है।

मलमास के दौरान राजगीर के महत्व को लेकर एक प्रसिद्ध लोककथा कौए (कागभुशुण्डि) से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा की इस पवित्र भूमि पर यज्ञ के समय सभी 33 कोटि देवताओं को राजगीर आने का निमंत्रण दिया जा रहा था, तब किसी अज्ञात कारणवश कागभुशुण्डि को न्योता नहीं भेजा गया। इसी अलौकिक व्यवस्था और मान-सम्मान की मर्यादा के कारण, मलमास के दौरान राजगीर के पूरे भौगोलिक क्षेत्र में एक भी कौआ कहीं दिखाई नहीं पड़ता है।